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mahabharat 3.115.5-6: अकृतव्रण ने कहा - राजन! आत्मज्ञानी परशुराम जी को पहले से ही पता था कि आप आ रहे हैं। वे आपसे बहुत प्रेम करते हैं, अतः वे शीघ्र ही आपके समक्ष प्रकट होंगे। ये तपस्वी प्रत्येक चतुर्दशी और अष्टमी को परशुराम जी के दर्शन करते हैं। आज रात्रि बीतने के बाद कल प्रातः चतुर्दशी होगी। 5-6।   |   mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  3.115.5-6 
अकृतव्रण उवाच
आयानेवासि विदितो रामस्य विदितात्मन:।
प्रीतिस्त्वयि च रामस्य क्षिप्रं त्वां दर्शयिष्यति॥ ५॥
चतुर्दशीमष्टमीं च रामं पश्यन्ति तापसा:।
अस्यां रात्र्यां व्यतीतायां भवित्री श्वश्चतुर्दशी॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अकृतव्रण ने कहा - राजन! आत्मज्ञानी परशुराम जी को पहले से ही पता था कि आप आ रहे हैं। वे आपसे बहुत प्रेम करते हैं, अतः वे शीघ्र ही आपके समक्ष प्रकट होंगे। ये तपस्वी प्रत्येक चतुर्दशी और अष्टमी को परशुराम जी के दर्शन करते हैं। आज रात्रि बीतने के बाद कल प्रातः चतुर्दशी होगी। 5-6।
 
Akritavrana said - King! Self-realized Parshuram ji had already known that you are coming. He loves you very much, so he will soon appear before you. These ascetics visit Parshuram ji on every Chaturdashi and Ashtami. After this night passes, it will be Chaturdashi tomorrow morning. 5-6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)