भृगुरुवाच
ऋतौ त्वं चैव माता च स्नाते पुंसवनाय वै।
आलिङ्गेतां पृथग् वृक्षौ साश्वत्थं त्वमुदुम्बरम्॥ ३५॥
अनुवाद
भृगु जी बोले - पुत्री! रजस्वला होने पर स्नान करके पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से तुम और तुम्हारी माता दो अलग-अलग वृक्षों का आलिंगन करो। तुम्हारी माता पीपल के वृक्ष का और तुम गूलर के वृक्ष का आलिंगन करो। 35.
Bhrigu Ji said - Daughter-in-law! After taking bath during the menstrual period, you and your mother should embrace two different trees for the purpose of getting a son. Your mother should embrace the Peepal tree and you should embrace the Gular tree. 35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥