Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.115.26-27: अकृतव्रण कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार शुल्क देने का वचन देकर ऋषि ऋचीक वरुण के पास गए और बोले - 'हे प्रभु! मुझे शुल्क के रूप में एक हजार घोड़े प्रदान करें, जिनके शरीर का रंग पीला हो और कान एक ओर से काले हों। साथ ही वे सभी घोड़े बहुत तेज हों।' उस समय वरुण ने उनकी इच्छानुसार उन्हें एक हजार काले कान वाले घोड़े दे दिए। | mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अकृतव्रण कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार शुल्क देने का वचन देकर ऋषि ऋचीक वरुण के पास गए और बोले - 'हे प्रभु! मुझे शुल्क के रूप में एक हजार घोड़े प्रदान करें, जिनके शरीर का रंग पीला हो और कान एक ओर से काले हों। साथ ही वे सभी घोड़े बहुत तेज हों।' उस समय वरुण ने उनकी इच्छानुसार उन्हें एक हजार काले कान वाले घोड़े दे दिए।
Akritavrana says - O King! Having pledged to pay the fee in this manner, sage Richik went to Varuna and said - 'O Lord! Provide me with a thousand horses as fee, whose body colour is pale and ears are black from one side. Also, all those horses should be very fast.' At that time, Varuna gave him a thousand black-eared horses as per his wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥