श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.115.12 
दत्तात्रेयप्रसादेन विमानं काञ्चनं तथा।
ऐश्वर्यं सर्वभूतेषु पृथिव्यां पृथिवीपते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी के स्वामी! श्री दत्तात्रेय की कृपा से उन्हें स्वर्णमय विमान प्राप्त हुआ था और पृथ्वी के समस्त प्राणियों पर उनका प्रभुत्व था ॥12॥
 
O lord of the earth! By the grace of Shri Dattatreya, he had got a golden plane and he had dominion over all the creatures on the earth. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)