श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.115.11 
रामेण चार्जुनो नाम हैहयाधिपतिर्हत:।
तस्य बाहुशतान्यासंस्त्रीणि सप्त च पाण्डव॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! हैहयराज कार्तवीर्य, ​​जो अर्जुन नाम से प्रसिद्ध हैं और जिन्हें परशुराम ने मारा था, उनके एक हजार भुजाएँ थीं ॥11॥
 
Son of Pandu! The Haihayaraj Kartavirya, popularly known as Arjun, whom Parashurama had killed, had a thousand arms. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)