श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.115.10 
रामस्य जामदग्न्यस्य चरितं देवसम्मितम्।
हैहयाधिपतेश्चैव कार्तवीर्यस्य भारत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भारत जमदग्निकुमार परशुराम और हैहयराज कार्तवीर्य का चरित्र देवताओं के समान है। 10॥
 
India The character of Jamadagnikumar Parshuram and Haihayraj Kartavirya is like that of gods. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)