श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.114.8 
हृते पशौ तदा देवास्तमूचुर्भरतर्षभ।
मा परस्वमभिद्रोग्धा मा धर्मान् सकलान् वशी:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! पशु का हरण हो जाने पर देवताओं ने उससे कहा, 'तुम्हें दूसरों का धन द्रोहित नहीं करना चाहिए (दूसरों का भाग नहीं लेना चाहिए) । धर्म के साधनरूपी समस्त यज्ञों का भाग लेने की इच्छा मत करो ॥8॥
 
O best of the Bharatas! After the animal was kidnapped, the gods said to him, 'You should not betray the wealth of others (do not take the share of others). Do not desire to take the share of all the sacrifices which are the means of Dharma.' ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)