श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.114.4 
लोमश उवाच
एते कलिङ्गा: कौन्तेय यत्र वैतरणी नदी।
यत्रायजत धर्मोऽपि देवाञ्छरणमेत्य वै॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब लोमशजी ने कहा, "कुंतीकुमार! यह कलिंग देश है, जिसमें वैतरणी नदी बहती है। जहाँ धर्म ने भी देवताओं की शरण लेकर यज्ञ किया था॥4॥
 
Then Lomasha said, "Kuntikumar! This is Kalinga country, in which the river Vaitarni flows. Where even Dharma had performed a yagya after seeking refuge in the gods. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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