श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.114.23 
सैषा प्रकाशते राजन् वेदी संस्थानलक्षणा।
आरुह्यात्र महाराज वीर्यवान् वै भविष्यसि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राजन! वही पृथ्वी माता इस मिट्टी की वेदी के रूप में यहाँ प्रकट हो रही हैं। हे राजन! इस पर सवार होकर तुम्हें बल और पराक्रम की प्राप्ति होगी॥ 23॥
 
King! That very Mother Earth is manifesting herself here in the form of this earthen altar. O King! By riding on it you will be blessed with power and valour.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)