श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.114.16 
लोमश उवाच
त्रिशतं वै सहस्राणि योजनानां युधिष्ठिर।
यत्र ध्वनिं शृणोष्येनं तूष्णीमास्स्व विशाम्पते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
लोमश बोले, "राजा युधिष्ठिर! जिस स्थान से आप यह ध्वनि सुन रहे हैं, वह यहाँ से तीन लाख योजन दूर है; अतः अब चुप रहिए।"
 
Lomasha said, "King Yudhishthira! The place from where you are hearing this sound is three lakh yojanas away from here; therefore keep quiet now."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)