Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.110.58: इसके साथ ही उसने उसे बहुत-सा धन और अनेक प्रकार के रत्न भी दिए। युधिष्ठिर! तत्पश्चात् वह वेश्या और यौवन से युक्त कुछ सुन्दर स्त्रियों को साथ लेकर शीघ्रतापूर्वक वन की ओर चली गई। 58. | mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धनं च प्रददौ भूरि रत्नानि विविधानि च।
ततो रूपेण सम्पन्ना वयसा च महीपते।
स्त्रिय आदाय काश्चित् सा जगाम वनमञ्जसा॥ ५८॥
अनुवाद
इसके साथ ही उसने उसे बहुत-सा धन और अनेक प्रकार के रत्न भी दिए। युधिष्ठिर! तत्पश्चात् वह वेश्या और यौवन से युक्त कुछ सुन्दर स्त्रियों को साथ लेकर शीघ्रतापूर्वक वन की ओर चली गई। 58.
Along with that, she also gave him a lot of wealth and many kinds of gems. Yudhishthira! Thereafter, taking along with her some beautiful women endowed with the form of a prostitute and youth, she hurriedly left for the forest. 58.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायामृष्यशृंगोपाख्याने दशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें ऋष्यशृंगोपाख्यानविषयक एक सौ दसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥