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mahabharat 3.110.42-43: हमने सुना है कि उसने जानबूझकर एक ब्राह्मण के साथ दुर्व्यवहार किया था। इस अपराध के कारण ब्राह्मणों ने राजा लोमपाद को त्याग दिया था। राजा ने मनमाने ढंग से पुरोहित पर दोष लगाया था, इसलिए इंद्र ने उसके राज्य में वर्षा रोक दी थी। इस अनावृष्टि के कारण प्रजा को बहुत कष्ट होने लगा। 42-43   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  3.110.42-43 
तेन कामात् कृतं मिथ्या ब्राह्मणस्येति न: श्रुति:।
स ब्राह्मणै: परित्यक्तस्ततो वै जगत: पति:॥ ४२॥
पुरोहितापचाराच्च तस्य राज्ञो यदृच्छया।
न ववर्ष सहस्राक्षस्ततोऽपीडॺन्त वै प्रजा:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हमने सुना है कि उसने जानबूझकर एक ब्राह्मण के साथ दुर्व्यवहार किया था। इस अपराध के कारण ब्राह्मणों ने राजा लोमपाद को त्याग दिया था। राजा ने मनमाने ढंग से पुरोहित पर दोष लगाया था, इसलिए इंद्र ने उसके राज्य में वर्षा रोक दी थी। इस अनावृष्टि के कारण प्रजा को बहुत कष्ट होने लगा। 42-43
 
We have heard that he deliberately misbehaved with a Brahmin. Due to this crime, the Brahmins had abandoned King Lomapada. The king had arbitrarily accused the priest, so Indra stopped the rain in his kingdom. Due to this lack of rain, the people started suffering a lot. 42-43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)