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mahabharat 3.110.18: हे भारत! आज भी यहाँ देवता और ऋषि निवास करते हैं। सायंकाल और प्रातःकाल उनके द्वारा प्रज्वलित अग्नि यहाँ देखी जा सकती है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.110.18 
देवाश्च ऋषयश्चैव वसन्त्यद्यापि भारत।
तेषां सायं तथा प्रातर्दृश्यते हव्यवाहन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! आज भी यहाँ देवता और ऋषि निवास करते हैं। सायंकाल और प्रातःकाल उनके द्वारा प्रज्वलित अग्नि यहाँ देखी जा सकती है॥18॥
 
Bharat! Even today gods and sages reside here. In the evening and morning the fire lit by them can be seen here.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)