श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  3.107.70 
तप:सिद्धिसमायोगात् स राजा भरतर्षभ।
वनाज्जगाम त्रिदिवं कालयोगेन भारत॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! राजा दिलीप तपस्विनी सिद्धि से युक्त होकर अन्त समय आने पर वन से स्वर्गलोक को चले गए ॥70॥
 
Bharatshrestha! King Dilip, united with the penance-oriented Siddhi, went from the forest to heaven when the end came. 70॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायामगस्त्यमाहात्म्यकथने सप्ताधिकशततमोऽध्याय:॥ १०७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें अगस्त्यमाहात्म्यवर्णनविषयक एक सौ सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०७॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७३ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)