श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.107.7 
वध्यमानास्ततो लोका: सागरैर्मन्दबुद्धिभि:।
ब्रह्माणं शरणं जग्मु: सहिता: सर्वदैवतै:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मंदबुद्धि सगरपुत्रों से पीड़ित समस्त लोग देवताओं सहित भगवान ब्रह्मा की शरण में गए॥7॥
 
All the people who were tormented by the dim-witted Sagarputras, along with all the gods, took refuge in Lord Brahma. 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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