श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 66-67
 
 
श्लोक  3.107.66-67 
तस्मै राज्यं समाधाय अंशुमानपि संस्थित:।
दिलीपस्तु तत: श्रुत्वा पितॄणां निधनं महत्॥ ६६॥
पर्यतप्यत दु:खेन तेषां गतिमचिन्तयत्।
गङ्गावतरणे यत्नं सुमहच्चाकरोन्नृप:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
दिलीप को राज्य देकर अंशुमान भी परलोक चले गए। जब ​​दिलीप ने अपने पूर्वजों के महासंहार का समाचार सुना, तो वे शोक से भर गए और उनकी मुक्ति का उपाय सोचने लगे। राजा दिलीप ने गंगाजी को पृथ्वी पर लाने के लिए बहुत प्रयत्न किए। 66-67.
 
After giving the kingdom to Dilip, Anshuman also went to the other world. When Dilip heard the news of the great massacre of his ancestors, he was filled with grief and started thinking of ways to save them. King Dilip made great efforts to bring Gangaji down to the earth. 66-67.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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