श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.107.51 
स दृष्ट्वा तेजसो राशिं पुराणमृषिसत्तमम्।
प्रणम्य शिरसा भूमौ कार्यमस्मै न्यवेदयत्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तेजोमय कपिल मुनि को देखकर अंशुमान ने भूमि पर सिर टेककर उन्हें अपना कार्य बताया ॥51॥
 
After seeing the radiant sage Kapil, Anshuman bowed his head to the ground and told him about his task. ॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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