श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.107.38 
युधिष्ठिर उवाच
किमर्थं राजशार्दूल: सगर: पुत्रमात्मजम्।
त्यक्तवान् दुस्त्यजं वीरं तन्मे ब्रूहि तपोधन॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा-तपोधन! बताओ नृपश्रेष्ठ सगर ने अपने वीर पुत्र का बलिदान क्यों दिया? 38॥
 
Yudhishthir asked – Tapodhan! Tell me why Nripashrestha Sagar had sacrificed his brave son. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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