श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.107.26 
छिन्नशीर्षा विदेहाश्च भिन्नत्वगस्थिसंधय:।
प्राणिन: समदृश्यन्त शतशोऽथ सहस्रश:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सैकड़ों-हजारों प्राणी दिखाई दे रहे थे जिनके सिर कटे हुए थे, शरीर फटे हुए थे, चमड़ा उधेड़ा हुआ था और हड्डियाँ टूटी हुई थीं॥ 26॥
 
Hundreds and thousands of creatures were seen whose heads were cut off, bodies were torn apart, skin was peeled off and bones were broken.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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