श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.107.11 
तत: काले बहुतिथे व्यतीते भरतर्षभ।
दीक्षित: सगरो राजा हयमेधेन वीर्यवान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात् बहुत काल के पश्चात् महाबली राजा सगर ने अश्वमेध्ययज्ञ की दीक्षा ली॥11॥
 
Bharatshrestha! After that, after a long time, the mighty king Sagar took the initiation of Ashvamedhyajna. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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