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mahabharat 3.105.14: हे महात्मन्! आपकी कृपा से समस्त लोकों को महान सुख प्राप्त हुआ है; क्योंकि क्रूर पराक्रम दिखाने वाला राक्षस कालेय आपके तेज से भस्म हो गया।   |   mahabharat अध्याय 3.105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.105.14 
त्वत्प्रसादान्महाभाग लोकै: प्राप्तं महत् सुखम्।
त्वत्तेजसा च निहता: कालेया: क्रूरविक्रमा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन्! आपकी कृपा से समस्त लोकों को महान सुख प्राप्त हुआ है; क्योंकि क्रूर पराक्रम दिखाने वाला राक्षस कालेय आपके तेज से भस्म हो गया।
 
'O great one! By your grace all the worlds have attained great happiness; because the demon Kaaleya, who displayed cruel prowess, was burnt by your brilliance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)