श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 103: भगवान् विष्णुके आदेशसे देवताओंका महर्षि अगस्त्यके आश्रमपर जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.103.8 
ते वृत्रं निहतं दृष्ट्वा सहस्राक्षेण धीमता।
जीवितं परिरक्षन्त: प्रविष्टा वरुणालयम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान इन्द्र के द्वारा वृत्रासुर को मारा गया देखकर वह प्राण बचाने के लिए समुद्र में जाकर छिप गया॥8॥
 
Seeing Vritrasura killed by the most intelligent Indra, he went and hid in the ocean to save his life. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)