श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 89: धृतराष्ट्रकी चिन्ता और उनका संजयके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.89.34 
ततो गाण्डीवनिर्घोषं श्रुत्वा पार्थस्य धीमत:।
गदावेगं च भीमस्य नालं सोढुं नराधिपा:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'उस समय अत्यन्त बुद्धिमान् अर्जुन के गाण्डीव धनुष की टंकार सुनकर तथा भीमसेन की गदा का महान् वेग देखकर कोई भी राजा उनका सामना नहीं कर सकेगा।
 
'At that time, hearing the twirling sound of the Gandiva bow of the extremely intelligent Arjuna and seeing the great speed of Bhimasena's mace, no king would be able to face him. 34.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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