श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 89: धृतराष्ट्रकी चिन्ता और उनका संजयके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.89.28 
अवृणोत् तत्र पाञ्चाली पाण्डवानामदासताम्।
सरथान् सधनुष्कांश्चाप्यनुज्ञासिषमप्यहम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तब पांचाली ने वर माँगा कि पाण्डव दासत्व के बंधन से मुक्त हो जाएँ। साथ ही मैंने पाण्डवों को रथ, धनुष आदि समस्त धन सहित इन्द्रप्रस्थ लौट जाने की आज्ञा दी॥ 28॥
 
Then Panchali asked for a boon that the Pandavas should be freed from the bondage of slavery. I also ordered the Pandavas to return to Indraprastha with all their wealth including chariot and bow etc.॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas