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mahabharat 2.88.d8: उसके बाद सभी गांववासी राजा युधिष्ठिर के लिए दुःखी हो गए। उस समय वहां मौजूद ब्राह्मण राजा युधिष्ठिर के बारे में निम्नलिखित बातें कहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 2.88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  2.88.d8 
तत: पौरजन: सर्व: शोचन्नास्ते जनाधिपम्।
कुर्वाणाश्च कथास्तत्र ब्राह्मणा: पार्थिवं प्रति॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद सभी गांववासी राजा युधिष्ठिर के लिए दुःखी हो गए। उस समय वहां मौजूद ब्राह्मण राजा युधिष्ठिर के बारे में निम्नलिखित बातें कहने लगे।
 
After that all the villagers became sad for King Yudhishthir. At that time the Brahmins there started saying the following things about King Yudhishthir.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)