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mahabharat 2.88.d7: धर्मराज के वन में चले जाने पर सभी वृद्ध कौरव भी अत्यन्त दुःखी हो गये और शोक तथा चिन्ता में डूब गये।   |   mahabharat अध्याय 2.88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  2.88.d7 
वनं गते धर्मराजे दु:खशोकपरायणा:।
बभूवु: कौरवा वृद्धा भृशं शोकेन पीडिता:॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज के वन में चले जाने पर सभी वृद्ध कौरव भी अत्यन्त दुःखी हो गये और शोक तथा चिन्ता में डूब गये।
 
When Dharamraj went to the forest, all the old Kauravas also became deeply saddened and immersed in sorrow and worry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)