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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन
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श्लोक 36
श्लोक
2.88.36
ततो दुर्योधन: कर्ण: शकुनिश्चापि सौबल:।
द्रोणं द्वीपममन्यन्त राज्यं चास्मै न्यवेदयन्॥ ३६॥
अनुवाद
तब दुर्योधन, कर्ण और सुबलपुत्र शकुनि ने द्रोणाचार्य को अपना द्वीप (शरण) मान लिया और अपना सम्पूर्ण राज्य उनके चरणों में समर्पित कर दिया॥ 36॥
Then Duryodhana, Karna and Shakuni, son of Subala, accepted Drona as their island (refuge) and surrendered their entire kingdom at his feet.॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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