नाहं जनं निर्दहेयं दृष्ट्वा घोरेण चक्षुषा।
स पिधाय मुखं राजा तस्माद् गच्छति पाण्डव:॥ १२॥
अनुवाद
इस भय से कि मैं किसी निर्दोष मनुष्य को भयानक दृष्टि से देखकर भस्म न कर दूँ, पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर अपना मुख ढककर चले जाते हैं ॥12॥
Fearing that I might turn an innocent man into ashes by looking at him with a terrifying gaze, King Yudhishthira, the son of Pandu, goes covering his face. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥