Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.85.37-38: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अर्जुन के ऐसा कहने पर परम सुन्दर एवं पराक्रमी योद्धा मद्रिनापुत्र सहदेव ने अपनी विशाल भुजा उठाकर शकुनि को मार डालने की इच्छा से ऐसा कहा; उस समय उसके नेत्र क्रोध से लाल हो रहे थे और वह फुंफकारते हुए सर्प के समान श्वास ले रहा था। | mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अर्जुन के ऐसा कहने पर परम सुन्दर एवं पराक्रमी योद्धा मद्रिनापुत्र सहदेव ने अपनी विशाल भुजा उठाकर शकुनि को मार डालने की इच्छा से ऐसा कहा; उस समय उसके नेत्र क्रोध से लाल हो रहे थे और वह फुंफकारते हुए सर्प के समान श्वास ले रहा था।
Vaishmpayana says - Janamejaya! When Arjuna said this, the most beautiful and mighty warrior, son of Madrina, Sahadeva, raised his huge arm and said this with the intention of killing Shakuni; at that time his eyes were turning red with anger and he was breathing like a hissing snake.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥