Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.85.33: अपने भाई भीमसेन को प्रसन्न करने की इच्छा से, अर्जुन युद्ध में अपने बाणों से कर्ण और उसके अनुयायियों को मारने की प्रतिज्ञा करता है।   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.85.33 
अर्जुन: प्रतिजानीते भीमस्य प्रियकाम्यया।
कर्णं कर्णानुगांश्चैव रणे हन्तास्मि पत्रिभि:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई भीमसेन को प्रसन्न करने की इच्छा से, अर्जुन युद्ध में अपने बाणों से कर्ण और उसके अनुयायियों को मारने की प्रतिज्ञा करता है।
 
Desiring to please his brother Bhimasena, Arjuna vows to kill Karna and his followers with his arrows in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)