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mahabharat 2.85.3: धृतराष्ट्रपुत्र महाबुद्धिमान राजा दुर्योधन सम्पूर्ण जगत् का एकछत्र शासक हो गया। पाण्डव पराजित हुए और उन्हें महान् संकटों का सामना करना पड़ा॥3॥   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.85.3 
प्रवृत्तं धार्तराष्ट्रस्य चक्रं राज्ञो महात्मन:।
पराजिता: पाण्डवेया विपत्तिं परमां गता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्रपुत्र महाबुद्धिमान राजा दुर्योधन सम्पूर्ण जगत् का एकछत्र शासक हो गया। पाण्डव पराजित हुए और उन्हें महान् संकटों का सामना करना पड़ा॥3॥
 
‘The great-minded King Duryodhana, son of Dhritarashtra, became the sole ruler of the entire world. The Pandavas were defeated and faced great trouble.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)