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mahabharat 2.85.20: भीमसेन बोले - हे क्रूर दु:शासन! ऐसे कटु वचन केवल तुम ही बोल सकते हो। तुम्हारे अतिरिक्त और कौन है जो छल-कपट से धन प्राप्त करके इस प्रकार अपनी प्रशंसा कर सकता है?   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.85.20 
भीमसेन उवाच
नृशंस परुषं वक्तुं शक्यं दु:शासन त्वया।
निकृत्या हि धनं लब्ध्वा को विकत्थितुमर्हति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - हे क्रूर दु:शासन! ऐसे कटु वचन केवल तुम ही बोल सकते हो। तुम्हारे अतिरिक्त और कौन है जो छल-कपट से धन प्राप्त करके इस प्रकार अपनी प्रशंसा कर सकता है?
 
Bhimasena said - O cruel Dushasan! Only you can utter such harsh words. Who else other than you would praise himself in this manner after acquiring wealth by deceit and fraud?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)