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mahabharat 2.85.11: द्रौपदी! जो पाण्डव सुन्दर सुन्दर वस्त्र पहनते थे, उन्हें वन में दरिद्र, अपमानित और मृगचर्म ओढ़े हुए देखकर तुम कितनी प्रसन्न होओगी? अब तुम अपनी इच्छानुसार किसी अन्य पुरुष को अपना पति बना सकती हो॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.85.11 
सूक्ष्मप्रावारानजिनोत्तरीयान्
दृष्ट्वारण्ये निर्धनानप्रतिष्ठान्।
कां त्वं प्रीतिं लप्स्यसे याज्ञसेनि
पतिं वृणीष्वेह यमन्यमिच्छसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी! जो पाण्डव सुन्दर सुन्दर वस्त्र पहनते थे, उन्हें वन में दरिद्र, अपमानित और मृगचर्म ओढ़े हुए देखकर तुम कितनी प्रसन्न होओगी? अब तुम अपनी इच्छानुसार किसी अन्य पुरुष को अपना पति बना सकती हो॥ 11॥
 
‘Draupadi! How happy will you be to see the Pandavas, who used to wear beautiful fine clothes, living in the forest poor, dishonoured and covered in a sheet of deerskin? Now you can make any other man you like your husband.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)