Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.84.4: यद्यपि मैं जानता हूँ कि वृद्ध राजा धृतराष्ट्र की आज्ञा से जुआ खेलने का यह निमंत्रण हमारे कुल के नाश का कारण बनेगा, फिर भी मैं उनकी आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकता ॥4॥ | mahabharat अध्याय 2.84: सबके मना करनेपर भी धृतराष्ट्रकी आज्ञासे युधिष्ठिरका पुन: जूआ खेलना और हारना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यपि मैं जानता हूँ कि वृद्ध राजा धृतराष्ट्र की आज्ञा से जुआ खेलने का यह निमंत्रण हमारे कुल के नाश का कारण बनेगा, फिर भी मैं उनकी आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकता ॥4॥
Even though I know that this invitation to gambling by the order of the old King Dhritarashtra will lead to the destruction of our clan, I cannot disobey his order. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥