श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 84: सबके मना करनेपर भी धृतराष्ट्रकी आज्ञासे युधिष्ठिरका पुन: जूआ खेलना और हारना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.84.15 
अनेन व्यवसायेन सहास्माभिर्युधिष्ठिर।
अक्षानुप्त्वा पुनर्द्यूतमेहि दीव्यस्व भारत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस निश्चय के साथ आओ और पुनः पासे फेंककर हमारे साथ जुआ खेलो॥15॥
 
Come with this resolve and throw the dice again and play gambling with us.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)