श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 81: धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको सारा धन लौटाकर एवं समझा-बुझाकर इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश देना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  2.81.8-9 
संवादे परुषाण्याहुर्युधिष्ठिर नराधमा:।
प्रत्याहुर्मध्यमास्त्वेतेऽनुक्ता: परुषमुत्तरम्॥ ८॥
न चोक्ता नैव चानुक्तास्त्वहिता: परुषा गिर:।
प्रतिजल्पन्ति वै धीरा: सदा तूत्तमपूरुषा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! साधारण बातचीत में भी नीच पुरुष कठोर वचन बोलने लगते हैं। जो पहले कठोर वचन नहीं बोलते, किन्तु प्रत्युत्तर में कठोर वचन बोलते हैं, वे मध्यम श्रेणी के होते हैं। किन्तु जो धैर्यवान एवं सज्जन पुरुष हैं, वे चाहे कोई कठोर वचन बोले या न बोले, अपने मुख से कभी कठोर या हानिकारक वचन नहीं बोलते। 8-9।
 
Yudhishthira! Even in ordinary conversation, mean men start speaking harsh words. Those who do not speak harsh words first but speak harsh words in reply are of the middle class. But those who are patient and noble men, whether someone speaks harsh words or not, never speak harsh or harmful words from their mouth. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)