ते रथान् मेघसंकाशानास्थाय सह कृष्णया।
प्रययुर्हृष्टमनस इन्द्रप्रस्थं पुरोत्तमम्॥ १८॥
अनुवाद
वे द्रौपदी के साथ मेघों के समान शब्द करने वाले रथों पर बैठकर प्रसन्न मन से सब नगरों में श्रेष्ठ इन्द्रप्रस्थ की ओर चल पड़े।
Seated with Draupadi on chariots making sounds like clouds, they proceeded with a happy mind to Indraprastha, the best of all cities.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि धृतराष्ट्रवरप्रदानपूर्वकमिन्द्रप्रस्थं प्रति युधिष्ठिरगमने त्रिसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें धृतराष्ट्रवरदानपूर्वक युधिष्ठिरका इन्द्रप्रस्थगमनविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥