श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 81: धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको सारा धन लौटाकर एवं समझा-बुझाकर इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.81.17 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्तो भरतश्रेष्ठ धर्मराजो युधिष्ठिर:।
कृत्वाऽऽर्यसमयं सर्वं प्रतस्थे भ्रातृभि: सह॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- भरतश्रेष्ठ! राजा धृतराष्ट्र की यह बात सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर ने पूज्य धृतराष्ट्र की आज्ञा स्वीकार की और भाइयों सहित वहाँ से चले गए॥17॥
 
Vaishampayanji says- Bharatshrestha! On hearing this from King Dhritarashtra, Dharmaraja Yudhishthir accepted the orders of revered Dhritarashtra and left from there along with his brothers. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)