श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 81: धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको सारा धन लौटाकर एवं समझा-बुझाकर इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.81.1 
युधिष्ठिर उवाच
राजन् किं करवामस्ते प्रशाध्यस्मांस्त्वमीश्वर:।
नित्यं हि स्थातुमिच्छामस्तव भारत शासने॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - राजन! आप हमारे स्वामी हैं। कृपया आज्ञा दीजिए, हमें क्या करना चाहिए? भरत! हम सदैव आपकी आज्ञा में रहना चाहते हैं॥1॥
 
Yudhishthira said - King! You are our master. Please command us, what should we do. Bharat! We always want to remain under your command.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)