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श्लोक 2.8.41  |
ईदृशी सा सभा राजन् पितृराज्ञो महात्मन:।
वरुणस्यापि वक्ष्यामि सभां पुष्करमालिनीम्॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! पितृराज महात्मा यम की सभा ऐसी ही है। अब मैं वरुण, पुष्कर आदि तीर्थों की मालाओं से सुशोभित सभा का भी वर्णन करूँगा॥41॥ |
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| Rajan! The meeting of Pitraj Mahatma Yama is like this. Now I will also describe the assembly decorated with garlands of pilgrimages like the idol of Varuna, Pushkar etc. 41॥ |
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इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि लोकपालसभाख्यानपर्वणि यमसभावर्णनं नामाष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत लोकपालसभाख्यानपर्वमें यमसभा-वर्णन नामक आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८॥
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