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mahabharat 2.78.2: राजाओं के पुत्रों और पौत्रों को चुप देखकर धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन ने मुस्कुराते हुए पांचाल राजकुमारी द्रौपदी से यह बात कही।   |   mahabharat अध्याय 2.78: दुर्योधनके छल-कपटयुक्त वचन और भीमसेनका रोषपूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 78: दुर्योधनके छल-कपटयुक्त वचन और भीमसेनका रोषपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  2.78.2 
दृष्ट्वा तथा पार्थिवपुत्रपौत्रां-
स्तूष्णींभूतान् धृतराष्ट्रस्य पुत्र:।
स्मयन्निवेदं वचनं बभाषे
पाञ्चालराजस्य सुतां तदानीम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजाओं के पुत्रों और पौत्रों को चुप देखकर धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन ने मुस्कुराते हुए पांचाल राजकुमारी द्रौपदी से यह बात कही।
 
Seeing the kings' sons and grandsons silent, Duryodhana, son of Dhritarashtra, smilingly said this to Panchala princess Draupadi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)