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mahabharat 2.77.1: द्रौपदी बोली, "हाय! जो कार्य मुझे पहले करना था, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ। मुझे उसे अभी करना चाहिए। इस बलवान, दुष्टबुद्धि दु:शासन ने मुझे बलपूर्वक घसीटकर ले जाकर बेचैन कर दिया है।"   |   mahabharat अध्याय 2.77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.77.1 
द्रौपद्युवाच
पुरस्तात् करणीयं मे न कृतं कार्यमुत्तरम्।
विह्वलास्मि कृतानेन कर्षता बलिना बलात्॥ १॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली, "हाय! जो कार्य मुझे पहले करना था, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ। मुझे उसे अभी करना चाहिए। इस बलवान, दुष्टबुद्धि दु:शासन ने मुझे बलपूर्वक घसीटकर ले जाकर बेचैन कर दिया है।"
 
Draupadi said, "Alas! The work which I had to do first has not been completed yet. I should do it now. This strong, evil-minded Dushasan has dragged me forcefully and has made me restless."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)