श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.76.9 
आहूतो हि परै राजा क्षात्रं व्रतमनुस्मरन्।
दीव्यते परकामेन तन्न: कीर्तिकरं महत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर को शत्रुओं ने जुआ खेलने के लिए बुलाया है; अतः वे क्षत्रिय व्रत को ध्यान में रखते हुए दूसरों की इच्छा से जुआ खेलते हैं। इससे हमारा महान यश फैलेगा॥9॥
 
Maharaja Yudhishthira has been called by his enemies for gambling; therefore keeping in mind the Kshatriya vow, he plays gambling at the will of others. This will spread our great fame.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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