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श्लोक 2.76.86  |
श्रेयान् सुधन्वा त्वत्तो वै मत्त: श्रेयांस्तथाङ्गिरा:।
माता सुधन्वनश्चापि मातृत: श्रेयसी तव।
विरोचन सुधन्वायं प्राणानामीश्वरस्तव॥ ८६॥ |
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| अनुवाद |
| 'विरोचन! सुधन्वा तुमसे श्रेष्ठ है, उसके पिता अंगिरा मुझसे श्रेष्ठ हैं और सुधन्वा की माता तुम्हारी माता से श्रेष्ठ है। अब यही सुधन्वा तुम्हारे प्राणों का स्वामी है।'॥86॥ |
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| 'Virochan! Sudhanva is superior to you, his father Angira is superior to me and Sudhanva's mother is superior to your mother. Now this Sudhanva is the master of your life.'॥ 86॥ |
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