श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  2.76.80 
वितथं तु वदेयुर्ये धर्मं प्रह्लाद पृच्छते।
इष्टापूर्तं च ते घ्नन्ति सप्त सप्त परावरान्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद! जो लोग धर्म के विषय में प्रश्न पूछने वालों को मिथ्या उत्तर देते हैं, वे न केवल अपने इच्छित धर्म का नाश करते हैं, अपितु अपने से पहले और बाद की सात पीढ़ियों के पुण्यों का भी नाश करते हैं।
 
Prahlada! Those who give false answers to those who ask questions on Dharma not only destroy their own desired Dharma but also destroy the merits of seven generations before and after them. 80.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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