श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.76.8 
न सकामा: परे कार्या धर्ममेवाचरोत्तमम्।
भ्रातरं धार्मिकं ज्येष्ठं कोऽतिवर्तितुमर्हति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भाई! शत्रुओं की इच्छा पूरी मत करो; उत्तम धर्म का पालन करो। कौन अपने धर्मात्मा बड़े भाई का अपमान कर सकता है?॥8॥
 
Brother! Don't fulfill the wishes of your enemies; follow the best of Dharma. Who can insult his virtuous elder brother?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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