श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.76.76 
तस्य संवत्सरे पूर्णे पाश एक: प्रमुच्यते।
तस्मात् सत्यं तु वक्तव्यं जानता सत्यमञ्जसा॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
एक वर्ष पूरा होने पर उसका एक छिद्र खुल जाता है; अतः सत्य को जानने वाले को चाहिए कि वह वास्तविक सत्य ही बोले ॥ 76॥
 
On completion of one year, one of its loopholes is opened; hence a person who knows the truth must speak only the actual truth. ॥ 76॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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