श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.76.72 
प्रह्लाद उवाच
त्वं वै धर्मस्य विज्ञाता दैवस्येहासुरस्य च।
ब्राह्मणस्य महाभाग धर्मकृच्छ्रमिदं शृणु॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद बोले, 'हे महामुन! आप देवताओं, दानवों और ब्राह्मणों के धर्म को भी जानते हैं। मेरे सामने धर्मसंकट उत्पन्न हो गया है, कृपया उसे सुनें।' 72.
 
Prahlada said, 'O great one! You know the Dharma of the Gods, Demons and Brahmins as well. A Dharma dilemma has arisen before me, please listen to it.' 72.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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