श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.76.71 
सुधन्वना तथोक्त: सन् व्यथितोऽश्वत्थपर्णवत्।
जगाम कश्यपं दैत्य: परिप्रष्टुं महौजसम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
सुधन्वा की यह बात सुनकर प्रह्लाद व्याकुल हो गया और पीपल के पत्ते की तरह काँपने लगा। इस विषय में कुछ पूछने के लिए वह महाबली कश्यप के पास गया।
 
On hearing Sudhanva say this, Prahlada became distressed and began to tremble like a peepal leaf. To ask something about this he went to the mighty Kasyapa.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas