श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.76.70 
यदि वै वक्ष्यसि मृषा प्रह्लादाथ न वक्ष्यसि।
शतधा ते शिरो वज्री वज्रेण प्रहरिष्यति॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
'प्रह्लाद, यदि तुम इस प्रश्न के उत्तर में झूठ बोलोगे या चुप रहोगे तो वज्रधारी इन्द्र अपने वज्र से तुम्हारे सिर के सैकड़ों टुकड़े कर देंगे।'
 
'Prahlaada, if you lie in answer to this question or remain silent, then Indra, the bearer of thunderbolt, will break your head into hundreds of pieces with his thunderbolt.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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